Bihar Board 12th Political Science Question Answer PDF Download : Short & Long Questions

Bihar Board 12th Political Science Question Answer

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर किन्हीं 10 प्रश्नों के उत्तर दें।

अति महत्त्वपूर्ण मॉडल सेट – 13

Q.1. भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों की व्याख्या करें। अथवा, भारत की विदेश नीति के कारक बतायें।

Ans. मुख्यत: भारतीय वैदेशिक नीति के मूल सिद्धान्त या उद्देश्य निम्नलिखित हैं

1. गुट निरपेक्षता की नीति भारत जब स्वाधीन हुआ उस समय विश्व दो गुटों में विभाजित था रूस और अमेरिका भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के सभी प्रश्नों पर गुटनिरपेक्षता की नीति का अवलम्बन किया और दोनों गुटों से पृथक रहने की जो नीति अपनाई।

2. शांति की विदेश नीति शांति की विदेश नीति भारतीय वैदेशिक नीति का दूसरा मूल सिद्धांत है।

3. मैत्री और सहअस्तित्व की नीति : भारतीय वैदेशिक नीति मैत्री और सहअस्तित्व पर जोर देती है। भारत की धारणाए यह रही है कि विश्व में परस्पर विरोधी विचारधाराओं में सह-अस्तित्व की भावना पैदा हो।

4. विरोधी गुटों के सेतुबन्ध बनाने की नीति अपनी विदेश नीति द्वारा भारत विश्व में परस्पर विरोधी गुटों के मध्य सेतुबन्ध का कार्य करता रहता है।

5. साधनों की पवित्रता की नीति: भारतीय वैदेशिक नीति अनैतिक और अवसरवादी नहीं है। साधनों की पवित्रता में भारत अटूट विश्वास करता है। अतः भारत सदैव ही अन्तर्राष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है हिंसात्मक साधनों का नहीं।

 

Q.2. नर्मदा बचाओ आंदोलन के क्या उद्देश्य थे ?

Ans. अस्सी के दशक के प्रारम्भ में भारत के मध्य भाग में स्थित नर्मदा घाटी में विकास परियोजना के तहत मध्यप्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र से गुजरने वाली नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर 30 बड़े, 135 बीच की आकार के व 300 छोटे बाँध बनाने का प्रस्ताव रखा गया।

इस परियोजना के निम्न उद्देश्य थे

(i) पानी को पीने के लिए व सिंचाई के लिए निश्चित करना।

(ii) बिजली उत्पादन के उद्देश्य से

(iii) कृषि विकास को बढ़ाने व कृषि की पैदावार को बढ़ाने के लिए।

नर्मदा बचाओ आन्दोलन अपने गठन के बाद से ही इस प्रकार की परियोजनाओं का विरोध करता रहा है जिसके कारण स्थानीय लोगों के पर्यावास, आजीविका, संस्कृति तथा पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता हो। प्रारम्भ में आन्दोलनकारियों ने यह माँग रखी थी कि इन परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को समुचित पुर्नवास किया जाये। नर्मदा बचाओ आन्दोलनकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी परियोजनाओं के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी होनी चाहिए व जल जंगल जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का प्रभावी नियंत्रण होना चाहिए।

 

Q.3. पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को स्पष्ट करें।

Ans. वैश्विक पर्यावरण को आगे कोई नुकसान न पहुँचाए बिना आर्थिक विकास करना सभी देशों के लिए एक गंभीर चुनौती है। इन चुनौतियों के मद्देनजर विभिन्न भागों में सक्रिय पर्यावरण के प्रति सचेत कार्यकर्त्ताओं ने की है। इन कार्यकर्ताओं में कुछ तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिकांश स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं।

आज पूरे विश्व में पर्यावरण सबसे ज्यादा जीवंत, विविधतापूर्ण तथा ताकतवर सामाजिक आंदोलनों में शुमार किए जाते हैं। सामाजिक चेतना के दायरे में ही राजनीतिक कार्यवाही के नये रूप जन्म लेते हैं, उन्हें खोजा जाता है। इन आंदोलनों से नए विचार निकलते हैं। इन आंदोलनों ने हमें दृष्टि दी है कि वैयक्तिक और सामूहिक जीवन के लिए आगे के दिनों में क्या करना चाहिए। और क्या नहीं करना चाहिए। यहाँ कुछ उदाहरणों की चर्चा की जा रही है जिससे पता चलता है कि मौजूदा पर्यावरण आंदोलनों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है।

दक्षिणी देशों मसलन मैक्सिको चिली, ब्राजील, मलेशिया, इंडोनेशिया, महादेशीय अफ्रीका और भारत (मिसाल के लिये ये कुछ थोड़े से नाम दिये जा रहे हैं) के वन-आंदोलनों पर बहुत दबाव है। तीन दशकों से पर्यावरण को लेकर सक्रियता का दौर जारी है। इसके बावजूद तीसरी दुनिया के विभिन्न देशों में वनों की कटाई खतरनाक गति से जारी है। पिछले दशक में विश्व के बचे-खुचे विशालतम वनों का विनाश बढ़ा है।

 

Q.4. ओजोन छिद्र का वर्णन करें।

Ans. समुद्र तल से 20-26 कि.मी., ऊपर समतापमंडल मंडल में (0) की एक मोटी परत लगभग 0.29 सेमी से 0.40 सेमी पाई जाती है। यह परत सूर्य से आनेवाली पराबैगनी किरणों के हानिकारक प्रभाव से पृथ्वी के जीव जन्तु को बचाती है।

CFCs, N O तथा CH, ओजोन अवक्षय करने वाले पदार्थों का वायुमंडल में विखरना, O, को नष्ट करता है ये ‘क्रियाशील क्लोरीन का निर्माण 40 विकिरण के साथ करते हैं जो O, का क्षय करता है। ये O, का विच्छेदन, O तथा O, में कर देते हैं। CH, तथा N O भी जटिल क्रियाओं द्वारा ओजोन क्षय करते हैं।

ग्रीन हाऊस गैसों की सांद्रता बढ़ने से हरित गृह प्रभाव भी बढ़ता है। इससे भूमंडलीय ताप में वृद्धि होती है। समुद्र तल ऊपर उठता है तथा वर्षा में भी अनियमितता आती है। पराबैगनी विकिरण भी अधिकता से पृथ्वी तक पहुँचती है जो मनुष्य में त्वचा कैंसर, कैटारैक्ट उत्पन्न करती है।

 

Q.5. वैश्वीकरण के कौन-कौन से लाभ हैं ?

Ans. वैश्वीकरण के कारण राज्य की क्षमता और ताकत भी प्रभावित होती है। उसी तरह वैश्वीकरण से वस्तुओं के व्यापार में वृद्धि हुई है। वैश्वीकरण ने विभिन्न देशों की संस्कृतियों को भी प्रभावित किया है।

वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी की भूमिका बड़ी ही महत्वपूर्ण है। इसमें कोई शक नहीं कि टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप के नवीनतम आविष्कारों ने विश्व के विभिन्न भागों के बीच संचार की क्रांति कर दिखायी है। शुरू-शुरू में जब छपाई (मुद्रण) की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी। इसी तरह आज हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव हमारे सोचने के तरीके पर पड़ेगा। हम अपने बारे में जिस ढंग से सोचते हैं और हम सामूहिक जीवन के बारे में जिस तर्ज पर सोचते हैं प्रौद्योगिकी का उस पर असर पड़ेगा।

विचार, पूँजी, वस्तु और लोगों की विश्व के विभिन्न भागों में आवाजाही की आसानी प्रौद्योगिकी में हुई तरक्की के कारण संभव हुई है। इन प्रवाहों की गति में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, विश्व के विभिन्न भागों के बीच पूंजी और वस्तु की गतिशीलता लोगों की आवाजाही की तुलना से ज्यादा तेज और व्यापक होगी।

 

Q.6. बिहार आन्दोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans. यूँ तो कांग्रेस पार्टी की सरकारों के खिलाफ पूरे देश में विरोध पनप रहा था परन्तु

बिहार व गुजरात में आंदोलन का रूप अधिक उग्र था। बिहार के आन्दोलन में विद्यार्थी भी शामिल हो गये थे व श्री जयप्रकाश नारायण इसका नेतृत्व कर रहे थे। इसी प्रकार से गुजरात में भी आन्दोलन बहुत सक्रिय था जिसका नेतृत्व मोरारजी देसाई कर रहे थे। श्री जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन को अहिंसात्मक तरीके से पूरे देश में चलाने की अपील की जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा। इस आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य केन्द्र व प्रान्तों की कांग्रेस सरकारों को हटाना था। इस आंदोलन में महंगाई व आर्थिक संकट को मुख्य मुद्दा बनाया गया। श्री जयप्रकाश नारायण ने इस आन्दोलन को सम्पूर्ण क्रांति का नाम दिया जिसका उद्देश्य सम्पूर्ण व्यवस्था में परिवर्तन करना था।

 

Q.7. पर्यावरण आंदोलन पर एक सक्षिप्त निबंध लिखें।

Ans. पर्यावरण को बचाने के लिये जो आंदोलन किया जाता है उसे पर्यावरण आंदोलन कहते हैं। इस क्षेत्र में भारत का योगदान सराहनीय है। 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन में प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने भाग लिया। इन्दिरा गाँधी की सरकार ने 1976 में संविधान में 42वां संशोधन किया। इसमें यह निर्देशक तत्व जोड़ा कि राज्य की सुरक्षा व उसका सुधार करेगा तथा वनों एवं वन्य जीवन को सुरक्षित रखेगा।

नागरिकों के लिए यह कर्त्तव्य निर्धारित किया गया कि वे प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखें। नगारिकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी कि वे वन, झीलों, नदियों व जीवों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें, उनका उचित ख्याल रखें। जीवों के प्रति सहानुभूति रखें। चिपको आंदोलन और नर्मदा बचाओ आंदोलन पर्यावरण से आयी जागृति के ज्वलंत उदाहरण हैं।

 

Q.8. मंडल आयोग पर एक संक्षिप्त निबंध लिखें।

Ans, 1978 में जनता दल की सरकार ने वी. पी. मंडल की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया। इस आयोग को मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है। इस आयोग का मुख्य कार्य पिछड़े

वर्गों की पहचान करना था। इन पिछड़े वर्गों की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का पता लगाकर उनकी स्थिति में सुधार हेतु उपाय बताना था। सरकार यह चाहती थी कि इन पिछड़े वर्गों का उत्थान हो तथा ये समाज के मुख्य धारा के साथ जुड़े। मंडल आयोग ने 31 दिसंबर, 1980 को अपनी सिफारिश पेश किया। मंडल आयोग ने इन पिछड़ी जातियों के उत्थान एवं इन्हें समाज के मुख्यधारा के साथ जोड़ने हेतु इनके लिए सरकारी नौकरी एवं शिक्षण संस्थाओं में 27% आरक्षण का सुझाव दिया।

 

Q.9. सूचना के अधिकार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans. सूचना के अधिकार का आन्दोलन जन आन्दोलनों की सफलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह आंदोलन सरकार से एक बड़ी माँग को पूरा कराने में सफल रहा है। इस आंदोलन की शुरूआत 1990 में हुई और इसका नेतृत्व किया मजदूर किसान शक्ति संगठन ने। राजस्थान में काम कर रहे इस संगठन ने सरकार के सामने यह माँग रखी कि अकाल राहत कार्य और मजदूरों को दी जाने वाली पगार के रिकॉर्ड का सार्वजनिक खुलासा किया जाए। यह माँग राजस्थान के एक बेहद पिछड़े इलाके -भीम तहसील में सबसे पहले उठाई गई थी। आंदोलन के दबाव में सरकार को राजस्थान पंचायती राजअधिनियम में संशोधन करना पड़ा। नए कानून के तहत जनता को पंचायत के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने की अनुमति मिल गई।

सरकार ने इन सिफारिशों का अध्ययन किया। अगस्त 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिश को लागू किया।

 

Q.10. सरदार बल्लभ भाई पटेल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans. सरदार बल्लभ भाई पटेल एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। वे स्वतंत्र भारत के उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता के बाद अधिकांश देशी रियासतों ने अपनी इच्छा से ही भारत में विलय को मंजूरी दे दी। परन्तु कुछ देशी रियासतों ने अपने निर्णय लेने में अत्यधिक देर लगाई। हैदराबाद, जूनागढ़ व काश्मीर के शासकों ने निर्णय लेने में देर लगाई। तात्कालीन भारत के गृहमंत्री श्री सरदार पटेल की कुशल प्रशासनिक व कूटनीतिक प्रयासों से इन रियासतों का भारत में विलय संभव हो सका। सरदार पटेल को भारत का लौहपुरूष कहा जाता है। वे एक विलक्षण प्रतिभा के स्वामी थे। उनका महान व्यक्तित्व और यशस्वी योगदान अद्वितीय है। उनके महान कार्य और सेवा के लिए उन्हें 1971 में भारत रत्न से विभूषित किया गया।

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Political Science all chapters Important question

भाग – A  समकालीन विश्व की राजनीति
1 शीत युद्ध का दौर
2 दो ध्रुवीयता का अंत
3 समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व 
4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
5 समकालीन दक्षिण एशिया 
6 अंतर्राष्ट्रीय संगठन 
7 समकालीन विश्व में सुरक्षा 
8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन 
9 वैश्विकरण
भाग – B स्वतंत्रता के समय से भारतीय राजनीति
 1 राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियां
 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर
 3 नियोजित विकास की राजनीति 
 4 भारत के विदेश संबंध 
 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना
 6 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
7 जन आंदोलनो का उदय
 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएं
 9 भारतीय राजनीति : नए बदलाव
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