12th Political Science Subjective Question PDF Download : Short & Long Questions

12th Political Science Subjective Question PDF

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर किन्हीं 10 प्रश्नों के उत्तर दें।

अति महत्त्वपूर्ण मॉडल सेट – 9

Q.1. तनाव शैथिल्य क्या है?

Ans, तनाव शैथिल्य को अंतर्राष्ट्रीय तनाव में कमी की स्थिति कहा जा सकता है। तनाव शैथिल्य सामान्य स्थिति नहीं कही जा सकती। इस शब्द का प्रयोग शीत युद्ध के संदर्भ में पूर्व-पश्चिम तनाव में कमी के लिए किया गया। तनाव शैथिल्य की अविध में शीत युद्ध समाप्त नहीं हुआ था, परंतु तनाव में निश्चित कमी हुई थी, और समझौते के संकेत मिलने आरंभ हो गए थे। तनाव में कितनी कमी हुई थी, यह तो नापा नहीं जा सकता था। यह पूर्व-पश्चिमी संघर्ष के परिवंश में परिवर्तन कहा जाता था। कोरल बेल के अनुसार, “तनाव शैथिल्य का अभिप्राय है तनाव में सोच-समझकर और जान-बूझकर की गई कमी।” इसका आशय यह है कि तनाव में शिथिलता अचानक नहीं आई, यह निश्चित प्रयासों का परिणाम थी।

 

Q.2. एक ध्रुवीय व्यवस्था (Uni-Polar) तथा द्विध्रुवीयता (Bi-Polar) में अंतर बताइये।

Ans. द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् 1945 से 1955 तक अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति द्वि-ध्रुवीकरण (अमेरिका और रूस का वर्चस्व) का उदय हुआ था जो 1955 के बाद बहु-ध्रुवीय व्यवस्था में परिवर्तन होने लगा। 1990-91 की अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं ने विश्व को । एक ध्रुवीय व्यवस्था की ओर मोड़ दिया। 1990 के खाड़ी युद्ध में अमरीका सर्वश्रेष्ठ शक्तिसम्पन्न राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आया। 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया। सोवियत संघ और पूर्वी यूरोप में साम्यवाद समाप्त हो गया। वारसा पैक्ट समाप्त हो गया। आज अमरीका आर्थिक और सैनिक शक्ति के क्षेत्र में सबसे आगे है। विश्व का कोई भी देश उसकी समानता नहीं कर सकता है। अमरीका का दबाव संयुक्त राष्ट्रसंघ पर भी देखा ज सकता है। विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष अमरीका के संकेत पर कार्य करते हैं। अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण के नाम पर अमरीका विश्व की एकमात्र महाशक्ति है। उसके नियम-कानूनों के विरुद्ध विश्व व्यापार संघ का कोई नियम प्रभावशाली नहीं होता। विश्वभर में होने वाले मौलिक अनुसन्धानों पर अमरीकी संस्थानों का वर्चस्व है। “सोवियत संघ सहित वारसा सन्धि के राष्ट्रों के पतन तथा कुवैत-इराक युद्ध में कुवैत को ओर से निर्णायक भूमिका निभाने के बाद अमरीका ने उस विश्व संरचना को पूरी तरह से बदल डाला है। अमरीका न केवल अपने को संसार का एकमात्र सूबेदार मान रहा है, बल्कि स्वयं एक सूबेदार के रूप में प्रखरता से उभरा भी है। ”

 

Q.3. संयुक्त राष्ट्र संघ के कौन-कौन से अंग हैं?

Ans. संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन के लिए उनके छः (Six) अंग बनाये गये हैं। वे अंग (organs) अग्रांकित हैं

1. साधारण या वृहत सभा (General Assembly),

2. सुरक्षा परिषद (Security Council).

3. आर्थिक व सामाजिक परिषद (Economic & Social Council).

4. न्याय परिषद (Trusteeship Council),

5. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय (Court of International Justice).

6. सचिवालय (Secretariat ) ।

 

Q.4. तीसरी दुनिया से आप क्या समझते हैं?

Ans. तीसरी दुनिया वस्तुतः एक नवीन राजनीतिक तथ्य है, जिसकी उत्पत्ति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई। 1950 ई० में जब शीत युद्ध अपने चरम सीमा पर था तब तीसरे विश्व का तात्पर्य उन राष्ट्रों के झुण्ड से लिया जाता था जो न तो पश्चिमी शक्ति (पहली दुनिया) और न ही साम्यवादी गुट (दूसरी दुनिया) के प्रति प्रतिबद्ध थे। वर्तमान दौर में इसका तात्पर्य ऐसे राष्ट्रों से है जो सदियों से गुलाम रहे हैं तथा अब मुक्तिबोधक विकास के किसी मार्ग की खोज में हैं। ये अपने विकास के लिए पहली तथा दूसरी दुनिया के देशों से विचारधारा, रानजीति अर्थनीति आदि से सहायता लेते हैं। ये रूस तथा चीन के विकास को अपना आदर्श मानते हैं तथा अपने यहाँ समाजवादी लोकतंत्र की बात करते हैं।

मिलर तथा शिशिर गुप्त के अनुसार तीसरी दुनिया की सामान्य विशेषता निर्धनता, नंगापन, अस्थिरता तथा दुर्बलता है परन्तु इन्हें पूर्णत: उचित नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि तीसरे विश्व के कुछ देश अपनी तेज संपदा के आधार पर धनवान बन गये हैं। परन्तु सामान्यतया इनके विदेश नीति में निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं।

(a) स्वतंत्र विदेश नीति,

(b) उपनिवेशवाद का विरोध,

(c) किसी महाशक्ति को अपने क्षेत्र में सैनिक अड्डा बनाने की अनुमति नहीं देना।

आज विश्व राजनीति में ये महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

Q.5. कांग्रेस की पुनर्स्थापन से आप क्या समझते हैं ?

Ans. कांग्रेस का इतिहास स्पष्ट रूप से बताता है कि 1952 के प्रथम चुनाव से लेकर 1962 तक कांग्रेस का प्रभुत्व सारे देश पर रहा। केन्द्र में व लगभग सभी राज्यों में कांग्रेस की सरकारें रही। पंडित जवाहर लाल नेहरू के करिश्माई नेतृत्व ने इस प्रभुत्व को बनाये रखा। परन्तु नेहरू के बाद 1967 में जब चौथा चुनाव हुआ तो कांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट आ गयी। देश के 9 राज्यों में कांग्रेस सरकार नहीं बना पायी। वोट प्रतिशत भी घटा। कांग्रेस की स्थिति में लगातार गिरावट आयी। 1966 में श्रीमती इंदिरा गाँधी व सिडिकेट के बड़े नेताओं में सत्ता संघर्ष प्रारम्भ हो गया जो 1969 में हुए राष्ट्रपति के चुनाव में खुलकर सामने आ गया व कांग्रेस 1969 में ही औपचारिक रूप से विभाजित हो गई। इस प्रकार से कांग्रेस में 1967 से लेकर 1969 तक गिरावट का दौर रहा। परन्तु 1971 में हुए मध्यावदि चुनाव ने इंदिरा कांग्रेस को फिर नया जीवन दिया। सभी विरोधी दलों के द्वारा कांग्रेस के खिलाफ विशाल गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस ने 48.4% वोट प्राप्त करके लोकसभा की 375 सीटें प्राप्त की। इससे यह भी सिद्ध हो गया कि इंदिरा कांग्रेस ही वास्तविक कांग्रेस है। इसी को कांग्रेस व्यवस्था की पुनर्स्थापना कहते हैं।

 

Q.6. वामपंथी दल से क्या तात्पर्य है?

Ans. विचारधाराओं के आधार पर राजनीतिक दलों को दक्षिणपंथी और वामपंथी रूप से विभाजित किया जाता है। दक्षिण पंथी दल साम्यवाद के विरोधी, परम्परागत मूल्यों के समर्थक होते हैं। ये स्वतंत्र निजी उद्यमों का समर्थन करते हैं। वामपंथी दल, सामान्य रूप से समाजवादी तथा साम्यवा नीतियों का समर्थन करते हैं।

 

Q.7. राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों में क्या अंतर है?

Ans. राष्ट्रीय दल उसे कहते हैं जो लोकसभा अथवा विधानसभा चुनावों में किन्हीं चार अथवा अधिक राज्यों में कुल डाले गए वैध मतों के 6 प्रतिशत मत प्राप्त करने के साथ ही किसी राज्य अथवा राज्यों से लोकसभा की कम से कम चार सीटें जीतेंगी अथवा लोकसभा में उसे तीन राज्यों से लोकसभा की दो प्रतिशत सीट जीतनी होगी।

क्षेत्रीय अथवा राज्यस्तरीय दल वे हैं जिनका प्रभाव राज्य की सीमा तक ही है। ऐसे दल को राज्य विधानसभा की कुल सदस्य संख्या की कम से कम तीन प्रतिशत सीटें अथवा तीन सीटें जीतना आवश्यक है।

 

Q.8. संकट कालीन स्थिति की घोषणा के क्या प्रभाव हैं?

Ans. संकटकालीन स्थिति की घोषणा का सर्वप्रथम प्रभाव यह है कि इस स्थिति में नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। देश की संघात्मक व्यवस्था समाप्त हो जाती है। राज्य का राज्यपाल संघीय सरकार का एजेन्ट बन जाता है। नागरिकों के मौलिक अधिकारों की समाप्ति हो जाती है। राष्ट्रपति देश का सर्वेसर्वा बन जाता है। राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता भीसमाप्त हो जाती है। राष्ट्रपति आपातकालीन उपबन्धों का दुरूपयोग कर तानाशाह बन सकता है।

 

Q.9. बीमारू राज्य क्या है?

Ans. सामाजिक विकास की दृष्टि से पिछड़े राज्य बिमारू राज्य कहलाते हैं। बिमारू राज्यों में बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश आते हैं ये राज्य सामान्यतः कम साक्षरता दर, अधिक शिशु मृत्यु दर आदि से ग्रसित है।

 

Q.310. विमुद्रीकरण क्या है? (What is Demonetization ?)

Ans. जब काला धन बढ़ जाता है और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन जाता है तो इसे दूर करने के लिए विमुद्रीकरण की विधि अपनाई जाती है। इसके अन्तर्गत सरकार पुरानी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है और नई मुद्रा चालू कर देती है। जिनके पास काला धन होता है वे उसके बदले नई मुद्रा नहीं ले पाते और काला धन स्वयं ही नष्ट हो जाता है। काला धन वह है जिसका हिसाब-किताब अधिकारियों से छिपा कर रखा जाता है।

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Political Science all chapters Important question

भाग – A  समकालीन विश्व की राजनीति
1 शीत युद्ध का दौर
2 दो ध्रुवीयता का अंत
3 समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व 
4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
5 समकालीन दक्षिण एशिया 
6 अंतर्राष्ट्रीय संगठन 
7 समकालीन विश्व में सुरक्षा 
8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन 
9 वैश्विकरण
भाग – B स्वतंत्रता के समय से भारतीय राजनीति
 1 राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियां
 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर
 3 नियोजित विकास की राजनीति 
 4 भारत के विदेश संबंध 
 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना
 6 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
7 जन आंदोलनो का उदय
 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएं
 9 भारतीय राजनीति : नए बदलाव
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